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<feed xmlns="http://www.w3.org/2005/Atom"><id>tag:krishnashankar.blog.co.uk,2009-11-09:/</id><title>रचनाकार </title><link rel="self" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/feed/atom/posts/"/><link rel="alternate" type="text/html" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/"/><generator version="1.0">MokoFeed</generator><updated>2009-11-09T23:49:26+01:00</updated><entry><id>tag:krishnashankar.blog.co.uk,2008-10-02:/2008/10/02/story-4810729/</id><title>story</title><link rel="alternate" type="text/html" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/10/02/story-4810729/"/><author><name>drshankarsonane</name></author><published>2008-10-02T11:56:16+02:00</published><updated>2008-10-02T11:56:16+02:00</updated><content type="html">	&lt;p&gt;                    उसे यह पता नहीं कि उसका यह नाम कैसे पड़ा । कोई कहता उसके पिता मुस्लिम थे और मां हिन्दू तो कोई कहता उसकी मां मुस्लिम थी और पिता हिन्दू । कोई कोई और कुछ कहता लेकिन जबसे उसने होश संभाला है तब से उसे यह आभास होने लगा है कि वह हिन्दू भी है और मुस्लिम भी है। उसे नहीं पता,वह कब से पांचों वक्त की नमाज अदा करने लगा है और उसे यह भी नहीं पता कि वह कब से रोज़ सुबह उठकर घर के कोने में प्रतिस्थापित भगवान की प्रतिमा की आरती उतारता रहा है। वह हिन्दुओं के त्यौहारों पर ,चाहे वह गणेश पूजन हो,डोल ग्यारह हो,नवरात्रा में दुर्गा पूजन हो,रामनवमी हो या कृष्ण जन्माष्ठमि हो,मनाता रहा है।&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;                 वह चारों धाम की यात्रा भी कर आया है और हज़ भी कर आया है। वह एकादशी,नवरात्रा व्रत,सत्यनारायण व्रत,जन्माष्टमी व्रत भी रखता है तो रोजे भी रखता है। वह गीता रामायण पढ़ता है तो कुरान शरीफ भी पढ़ता है।उसे तो बस इतना पता है कि वह हिन्दुओं के सारे पूजा पाठ से लेकर मुस्लिमों की सारी इबादतें भी करता रहा है। मुस्लिमों के सारे त्यौहार मनाता है । मीठी ईद,बकर ईद,शब्बारात से लेकर पीरगाहों तक वह इबादत करने जाता है। वह मन्दिरों में दोंनों वक्त जाता है तो मस्जिदों में भी नमाज अदा करने जाता है। हां,लेकिन उसने लिबास में बदलाव न लाते हुए महात्मा गांधी का अनुसरण करते हुए सारा लिबास पसन्द किया 1&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;                 वह अक्सर खादी की धोती और खादी का ही कुर्ता पहनता है। कभी जूता नहीं पहनता बल्कि खादी भण्डार जाकर अपने लिए सारा चप्पलें ले आता है। यही है उसका पहनावा । इसी पहनावे को लेकर मोहल्ले के लोग,दोस्त और साथ में उठने बैठनेवाले उसे हिन्द खान भाई कहकर सम्बोधित करते है।मित्रों और परिचितों में वह दो तरह से जाना जाता है। हिन्दू उसे हिन्दू भाई से सम्बोधित करते तो मुस्लिम उसे खान भाई से सम्बोधित करते । कोई उससे पूछता है कि उसके माता पिता का नाम क्या है तो वह हंसकर बताता है कि उसकी माता का नाम भारत माता है और पिता का नाम हिमाला है। वह अपना मज़हम भारतीय बताता । वह कहता है जिस देश में हिन्दू मुस्लिम एकता और भाईचारे के साथ रहते है वहां हिन्दू और मुस्लिमों में कोई भेद ही नहीं है। यह भेदभाव हिन्दू मुस्लिमों में नहीं है लेकिन इस भेदभाव की खाई नेताओं ने अपने स्वार्थ को लेकर तैयार की है।&lt;br&gt;
                 हम भारतियों में फूट डालकर राज करने के लिए तैयार की है ताकि हम लोग आपस में लड़ते मरते रहें और ये नेता हम पर राज करते रहे । हमारा शोषणा करते रहे ।करीब पच्चीस तीस बरस पहले वह काजी बाबा को एक मेले में मिला था । बाबा बताते हैं ,शहर में कोई मेला लगा था और वह उसी मेले में रोते बिलखते हुए मिला था।पहले तो पुलिस से सहायता ली कि इसके मां बाप का पता लगाकर इसे उनके सुपुर्द कर दें लेंकिन उसे मां बाप का पता नहीं चला । पुलिस उसे अनाथालय भेज रही थी किन्तु काजी बाबा के अनुरोध पर पुलिस ने उसे उन्हें दे दिया । काजी बाबा उसे अपने साथा ले आए । काजी बाबा इस आसमंजस्य में पड़ गए थे कि वह जाने किस मज़हब का है हिन्दू है या मुस्लिम है। उन्होंने इस पचड़े में पड़ने की बजाय उसे दोनों मजहबों की तालीम देने लेगे । उसे कुरानशरीफ से लेकर गीता रामायण तक की शिक्षा दी । इबादत नमाज रोजे से लेकर पूजा पाठ और व्रत उपवास करना भी सिखाया ।&lt;br&gt;
               अब की बार ईद और दीपावली साथ साथ आई थी । शायद दीपावली के बाद ईद पड़ी थी । उसने दीपावली और ईद मनाने की तैयारी साथ साथ शुरू कर दी थी । महिने भर पहले से ही वह इस तैयारी में लग गया था । वह जितनी तवज्जो मुस्लिम मज़हब को देता उतनी ही हिन्दू मजहब को दे रहा था ।अभी दो दिन ही त्यौहारों के बाकी थे कि राजनीति के चलते मन्दिर मस्जिद विवाद के बहाने दोनों समुदाय में दंगे का महौल बन गया । दोनों एक दूसरे के रक्त के प्यासे हो गए &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;                 उस रोज़ वह घर में ही था । काजी बाबा मस्जिद गए हुए थे। बाहर शोरगुल सुनकर वह बाहर आ गया । देखता है,दरवाज़े की एक ओर दस बीस हिन्दू हथियार लिए खड़े है तो दरवाज़े की दूसरी ओर भी इतने ही मुस्लिम भी हथियार लिए खड़े है। वह समझ नहीं पाया कि इतने सारे लोग हथियार लिए उसके दरवाज़े के सामने इस तरह क्यों खड़े है। वह दोनों ओर देखते ही रह गया । हिन्दु्ओं ने हथियार उठाए और ऊंची आवाज़ में बोले,” मारो,मारो , बच न पाएं ।”दूसरी ओर से मुस्लिम भी ऊंची आवाज़ में बोले,” मारो,मारो , बच न पाएं ।”हिन्दुओं और मुस्लिमों ने हथियार उठा लिए ।&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;              अब तक वह स्थिति समझ चुका था । वह चीख पड़ा,” किसको मारोगे,मुझको,क्या मैं हिन्दू नहीं हूं या क्या मैं मुस्लिम नहीं हूं । बताओ मैं कौन हूं।”उसका इस तरह चीखकर प्रश्न करना हिन्दुओं और मुस्लिमों को भारी पड़ रहा था । वे समझ नहीं पा रहे थे कि जिसे वे मारने के लिए यहां एकत्र हुए है,वह हिन्दू है या फिर मुस्लिम है। वह फिर चीख पड़ातुममें जो हिन्दू है वह मुस्लिम समझ कर मुझे मारें और तुममें जो मुस्लिम है वे हिन्दू समझकर मुझे मारें। बताओ तुम किसको मारना चाहते हो । क्या तुम बता सकते हो कि मैं हिन्दू हूं या मुस्लिम । मैं एक इन्सान हूं क्या तुम लोग एक इन्सान को मारना चाहते हो,तो मारों,मैं यह खड़ा हूं ।हिन्दू और मुस्लिम समझ नहीं पा रहे थे कि वह उसे क्या समझ कर मारें। हिन्दू या मुस्लिम। उनके हथियार उठे के उठे ही रह गए -.&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;                                                       कृष्णशंकर सोनाने &lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;small&gt; &lt;a href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/10/02/story-4810729/#comments"&gt;Comments&lt;/a&gt; &lt;/small&gt; &lt;/p&gt;</content></entry><entry><id>tag:krishnashankar.blog.co.uk,2008-08-09:/2008/08/09/a-2342-a-2375-a-2352-a-2309-a-2348-a-237-4563855/</id><title>देर अबेर सही</title><link rel="alternate" type="text/html" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/08/09/a-2342-a-2375-a-2352-a-2309-a-2348-a-237-4563855/"/><author><name>drshankarsonane</name></author><published>2008-08-09T15:55:59+02:00</published><updated>2008-08-09T15:55:59+02:00</updated><content type="html">	&lt;p&gt;&lt;img src="http://krishnshanker.blogspot.com" alt="null" title="null"&gt;&lt;br&gt;
जो मैंने सुनी&lt;br&gt;
शायद तुमने कही&lt;br&gt;
अनकही।&lt;br&gt;
निरर्थक नहीं होते शब्द&lt;br&gt;
निर्झर से बहते&lt;br&gt;
बातों ही बातों के सोते ।&lt;br&gt;
मन की कहीन&lt;br&gt;
न रह जाए&lt;br&gt;
कहो तो सही&lt;br&gt;
आज,कल,परसों&lt;br&gt;
कानों में घुलते&lt;br&gt;
वो शब्द मधुरिम&lt;br&gt;
सहो तो सही ।&lt;br&gt;
      -.कृष्णशंकर सोनाने
&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;small&gt; &lt;a href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/08/09/a-2342-a-2375-a-2352-a-2309-a-2348-a-237-4563855/#comments"&gt;Comments&lt;/a&gt; &lt;/small&gt; &lt;/p&gt;</content></entry><entry><id>tag:krishnashankar.blog.co.uk,2008-07-13:/2008/07/13/p-o-e-m-a-2342-a-2379-a-2360-a-2381-a-23-4441384/</id><title>p o e m - दोस्त बनकर</title><link rel="alternate" type="text/html" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/07/13/p-o-e-m-a-2342-a-2379-a-2360-a-2381-a-23-4441384/"/><author><name>drshankarsonane</name></author><published>2008-07-13T11:57:34+02:00</published><updated>2008-07-13T11:57:34+02:00</updated><content type="html">	&lt;p class="center"&gt;भेड़िए कभी छिपते नहीं&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
दुश्मन जब&lt;br&gt;
आपस में मिलना शुरू कर दे&lt;br&gt;
करें मि़त्रों की तरह व्यवहार&lt;br&gt;
लगे रिश्तों मे अपनापन।&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
जब दुश्मन&lt;br&gt;
जागरूक हो जाए&lt;br&gt;
पेश आए सावधानी से&lt;br&gt;
मागने लगे दुहाईयां&lt;br&gt;
लगे मिमियाने भेड़ों की तरह।&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
जब दुश्मन&lt;br&gt;
उतारने लगे बलैया&lt;br&gt;
तारीफों के लगे बांधने पुल&lt;br&gt;
करने लगे मित्रों की बुराइया।&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
दुश्मन जब&lt;br&gt;
वर्जनाएं लगे तोड़ने&lt;br&gt;
पहनने लगे जामा सभ्यता का&lt;br&gt;
धतियाने लगे परम्पराएं&lt;br&gt;
लगे बिचकाने मुंह&lt;br&gt;
दिखाकर अपनापन ।&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
जब दुश्मन&lt;br&gt;
चढ़ाने लगे मनौतियां&lt;br&gt;
पहनाने लगे माला फूलों की&lt;br&gt;
लगाने लगे मरहम घावों पर&lt;br&gt;
बगल में छिपाए हुए कटारी से&lt;br&gt;
छिलने लगे तलवें&lt;br&gt;
लगे खोजने अर्थ मतलब के।&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
दुश्मन जब&lt;br&gt;
मिलने लगे आपस में गलें&lt;br&gt;
साम्प्रदायिकों सी चले चालें&lt;br&gt;
सभ्यता का दुशाला ओढ़े हुए ।&lt;br&gt;
आज हमारे बीच से ही&lt;br&gt;
कुछ दुश्मन कर रहे होंगे&lt;br&gt;
एक दूसरे के खिलाफ&lt;br&gt;
एक दूसरे के लिए&lt;br&gt;
घिनौना संघर्ष...&lt;br&gt;
दोस्त बनकर&lt;br&gt;
अपनत्व दिखाएं&lt;br&gt;
शेर की खाल में&lt;br&gt;
भेड़िए छिपते नहीं ।&lt;br&gt;
0&lt;br&gt;
Once wolves not hide /&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
When the enemy /&lt;br&gt;
Each other to get started /&lt;br&gt;
To behave like a friend /&lt;br&gt;
Began their relationship in the water. /&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
When the enemy /&lt;br&gt;
To be aware /&lt;br&gt;
Presenting the carefully /&lt;br&gt;
Ask him oath /&lt;br&gt;
Began. Sheep in the way/.&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
When the enemy /&lt;br&gt;
Arti began landing /&lt;br&gt;
Nuapada of the bridge began tying /&lt;br&gt;
The friends began to evil /&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
When the enemy /&lt;br&gt;
Began to break taboo/&lt;br&gt;
Jama began wearing a civilisation /&lt;br&gt;
Began to remove traditions /&lt;br&gt;
Mouth began to jeer /&lt;br&gt;
Apnapan showing. /&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
When the enemy /&lt;br&gt;
Offerings began Mannat /&lt;br&gt;
Garland of flowers began Mala /&lt;br&gt;
Began to put balm on the wounds /&lt;br&gt;
Next to hide from the rapier /&lt;br&gt;
Began to whittle sole /&lt;br&gt;
Began to find the meaning of meaning. /&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
When the enemy /&lt;br&gt;
Began to meet each other in the neck /&lt;br&gt;
Walk like a communal tactics /&lt;br&gt;
The shawl wrapped civilization. /&lt;br&gt;
Today, only between us /&lt;br&gt;
Some of the enemy will be doing /&lt;br&gt;
Against each other /&lt;br&gt;
With each other, /&lt;br&gt;
Abhorrent struggle ./..&lt;br&gt;
Become friends /&lt;br&gt;
Its water. Show /&lt;br&gt;
Tiger skin in /&lt;br&gt;
Wolf hide./&lt;br&gt;
0&lt;br&gt;
chinese-traditional&lt;br&gt;
一旦狼不要隱瞞&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
當敵人&lt;br&gt;
對方要開始&lt;br&gt;
的表現，就像一個朋友&lt;br&gt;
開始他們的關係在水中。&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
當敵人&lt;br&gt;
要知道，&lt;br&gt;
介紹仔細&lt;br&gt;
問他誓言&lt;br&gt;
開始。羊在的方式。&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
當敵人&lt;br&gt;
人工開始登陸&lt;br&gt;
nuapada該大橋開始綁&lt;br&gt;
朋友開始邪惡&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
當敵人&lt;br&gt;
開始打破禁忌&lt;br&gt;
賈馬開始身穿文明&lt;br&gt;
開始，以消除傳統&lt;br&gt;
口開始jeer&lt;br&gt;
apnapan顯示。&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
當敵人&lt;br&gt;
產品開始mannat&lt;br&gt;
加蘭花開始的Mala&lt;br&gt;
開始把膏對創傷&lt;br&gt;
旁邊的隱藏從劍桿織機&lt;br&gt;
開始惠特爾的唯一&lt;br&gt;
開始尋找的意思意思。&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
當敵人&lt;br&gt;
開始，以應付對方在頸部&lt;br&gt;
走路像一個公用的戰術&lt;br&gt;
該披肩包裹著文明。&lt;br&gt;
今天，只有我們之間&lt;br&gt;
一些敵人會做&lt;br&gt;
對對方&lt;br&gt;
與對方，&lt;br&gt;
可惡的鬥爭...&lt;br&gt;
成為朋友&lt;br&gt;
它的水。顯示&lt;br&gt;
虎皮在&lt;br&gt;
狼來了藏身之地。&lt;br&gt;
0&lt;br&gt;
japanese&lt;br&gt;
一度オオカミ特定非表示&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
敵のときに&lt;br&gt;
お互いのご利用を開始する&lt;br&gt;
に動作するようにする友人に送る&lt;br&gt;
彼らの関係は、水を開始します。&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
敵のときに&lt;br&gt;
が、知っておくべき&lt;br&gt;
慎重に提示する&lt;br&gt;
求めて宣誓&lt;br&gt;
が始まった。羊の道です。&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
敵のときに&lt;br&gt;
芸術が始まった着陸&lt;br&gt;
同点の橋が始まったのnuapada&lt;br&gt;
悪に、友達の開始を&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
敵のときに&lt;br&gt;
が始まったのタブーを破る&lt;br&gt;
邪魔を着て文明が始まった&lt;br&gt;
が始まったの伝統を削除する&lt;br&gt;
口の中にやじを飛ばすが始まった&lt;br&gt;
apnapan表示中です。&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
敵のときに&lt;br&gt;
mannat提供を開始&lt;br&gt;
ガーランドの花が始まったのMala&lt;br&gt;
バームを始めたの傷に&lt;br&gt;
次のページを非表示にからのレイピア&lt;br&gt;
単独始めたホイットル&lt;br&gt;
を見つけるには意味の意味を開始します。&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
敵のときに&lt;br&gt;
お互いに始めたの首を満たす&lt;br&gt;
共同作戦のように歩く&lt;br&gt;
文明のショールに包まれます。&lt;br&gt;
今日、私たちの間のみ&lt;br&gt;
いくつかの敵にされること&lt;br&gt;
お互いに反対&lt;br&gt;
お互い、&lt;br&gt;
忌まわしい闘争...&lt;br&gt;
友達になる&lt;br&gt;
その水です。見せる&lt;br&gt;
トラの皮で&lt;br&gt;
オオカミ非表示にします。&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;small&gt; &lt;a href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/07/13/p-o-e-m-a-2342-a-2379-a-2360-a-2381-a-23-4441384/#comments"&gt;Comments&lt;/a&gt; &lt;/small&gt; &lt;/p&gt;</content></entry><entry><id>tag:krishnashankar.blog.co.uk,2008-06-26:/2008/06/26/hi-4368352/</id><title>POEM</title><link rel="alternate" type="text/html" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/06/26/hi-4368352/"/><author><name>drshankarsonane</name></author><published>2008-06-26T18:50:45+02:00</published><updated>2008-06-27T01:48:50+02:00</updated><content type="html">	&lt;p&gt;The threshold Amma &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;Bidi freak of Amma&lt;br&gt;
How much to smoke the bidi in the day&lt;br&gt;
Whenever receive a bidi stub&lt;br&gt;
Half-burned half extinguished&lt;br&gt;
Amma does not come from drinking it baaz.&lt;br&gt;
Who will help you all so much property Amma&lt;br&gt;
Tirath bench of the four Dham moved far away&lt;br&gt;
Who Are there without the will of courage&lt;br&gt;
Entered into in the mansion.&lt;br&gt;
Themselves are not always cross the threshold of&lt;br&gt;
Do not return to pain in the back&lt;br&gt;
It does not look hear&lt;br&gt;
Legal paper on the wrong finger&lt;br&gt;
Nand in deep sleep, the son has taken all property seized feel touched by the finger touches the mark. Munshi was read to extinguish the mother heard what the eyes see a lamp like the one being the daughter of chiropractic weeping of the birth of her daughter to take on.&lt;br&gt;
Foreign funds are daughters of foreign funds increases daughters.&lt;br&gt;
Mother's tears are moving eyes, cross the threshold.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;small&gt; &lt;a href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2008/06/26/hi-4368352/#comments"&gt;Comments&lt;/a&gt; &lt;/small&gt; &lt;/p&gt;</content></entry><entry><id>tag:krishnashankar.blog.co.uk,2007-05-18:/2007/05/18/a_2352_a_2330_a_2344_a_2366_a_2325_a_236~2292530/</id><title>रचनाकार</title><link rel="alternate" type="text/html" href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2007/05/18/a_2352_a_2330_a_2344_a_2366_a_2325_a_236~2292530/"/><author><name>drshankarsonane</name></author><published>2007-05-18T15:35:40+02:00</published><updated>2007-05-18T15:35:40+02:00</updated><content type="html">	&lt;p&gt;रचनाकार डा.कृष्णशंकर सोनाने&lt;br&gt;
गजल &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;हमको मजा आता है गले दुश्‍मनों को लगाने में&lt;br&gt;
तुम यकीं करते नहीं किसी को दोस्‍त बनाने में.&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;हजार तोहमतें हम पर लगाया करो लेकिन&lt;br&gt;
कुछ तो शरम करो अपनी आबरु लुटाने में .&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;तुम वाबस्‍ता हम पर इल्‍जाम लगा सकते हो&lt;br&gt;
पसीना छूट जाएगा तुमको सबूत जुटाने मे.&lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;तुम किसी की आँख का नूर बन कर तो दिखाओ&lt;br&gt;
उम्र गुजर जाएगी एक रोशनी जलाने में .&lt;br&gt;
00&lt;br&gt;
तुमसे निस्बत रहे सदा बाबा सैय्यद परैडवाले&lt;br&gt;
इसके सिवाय क्या चाहूँ बाबा सैय्यद परैड़वाले । &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;बड़ी दूर तलक तेरी तारीफ के चर्चे आम हुए हैं&lt;br&gt;
दुआ सबकी कुबूल बाबा सैय्यद परैड़वाले ।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;मेरी नज़रों से भी देखें कोई अगर तुमको&lt;br&gt;
सबाब उसे भी मिलेगा बाबा सैय्यद परैड़वाले । &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;पेशानी पर रख हाथा तुमने की दुआ कुबुल हमारी&lt;br&gt;
मेरा वजूद रौशन किया बाबा सैय्यद परैड़वाले । &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;रहनुमा बरके राह रौशन कर दी तूने तमाम&lt;br&gt;
निगमबान तू है मेरा बाबा सैय्यद परैड़वाले ।&lt;br&gt;
0&lt;br&gt;
राम कहो कृष्ण कहों ला इलाहा इल्लिलाह,&lt;br&gt;
बुद्ध कहो या ईसा कहो ला इलाहा इल्लिलाह ।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;काबा में पूजो किंवा काशी में कोई फर्क नहीं पड़ता&lt;br&gt;
दिल में तुम झाँक कर देखो ला इलाहा इल्लिलाह।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;आदमी का खून बहाने से कुछ हासिल नहीं होगा&lt;br&gt;
इन्सानियत की पूजा करो ला इलाहा इल्लिलाह।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;रोते हुए इन्सां को ज़रा हंसा के दिखला दो&lt;br&gt;
फक्र् से मुस्कराये खुदा ला इलाहा इल्लिलाह ।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;इन्सानियत हो तो सीना तान के तुम कह दो&lt;br&gt;
पड़ौसी मेरा ईमान है ला इलाहा इल्लिलाह ।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;प्रेम की शाख पे यारों दिलों के फूल खिलते हैं&lt;br&gt;
मीठी मीठी जुबान से बोलो ला इलाहा इल्लिलाह।। &lt;/p&gt;
	&lt;p&gt;किसी मुफलिस की भूख से ज्यादा कुछ भी नहीं होता&lt;br&gt;
एक वक्त की रोटी दे दो ला इलाहा इल्लिलाह ।।&lt;br&gt;
00&lt;/p&gt;
&lt;p&gt; &lt;small&gt; &lt;a href="http://krishnashankar.blog.co.uk/2007/05/18/a_2352_a_2330_a_2344_a_2366_a_2325_a_236~2292530/#comments"&gt;Comments&lt;/a&gt; &lt;/small&gt; &lt;/p&gt;</content></entry></feed>
