जो मैंने सुनी
शायद तुमने कही
अनकही।
निरर्थक नहीं होते शब्द
निर्झर से बहते
बातों ही बातों के सोते ।
मन की कहीन
न रह जाए
कहो तो सही
आज,कल,परसों
कानों में घुलते
वो शब्द मधुरिम
सहो तो सही ।
-.कृष्णशंकर सोनाने
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देर अबेर सही
@ 2008-08-09 – 15:55:59
