रचनाकार डा.कृष्णशंकर सोनाने
गजल
हमको मजा आता है गले दुश्मनों को लगाने में
तुम यकीं करते नहीं किसी को दोस्त बनाने में.
हजार तोहमतें हम पर लगाया करो लेकिन
कुछ तो शरम करो अपनी आबरु लुटाने में .
तुम वाबस्ता हम पर इल्जाम लगा सकते हो
पसीना छूट जाएगा तुमको सबूत जुटाने मे.
तुम किसी की आँख का नूर बन कर तो दिखाओ
उम्र गुजर जाएगी एक रोशनी जलाने में .
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तुमसे निस्बत रहे सदा बाबा सैय्यद परैडवाले
इसके सिवाय क्या चाहूँ बाबा सैय्यद परैड़वाले ।
बड़ी दूर तलक तेरी तारीफ के चर्चे आम हुए हैं
दुआ सबकी कुबूल बाबा सैय्यद परैड़वाले ।।
मेरी नज़रों से भी देखें कोई अगर तुमको
सबाब उसे भी मिलेगा बाबा सैय्यद परैड़वाले ।
पेशानी पर रख हाथा तुमने की दुआ कुबुल हमारी
मेरा वजूद रौशन किया बाबा सैय्यद परैड़वाले ।
रहनुमा बरके राह रौशन कर दी तूने तमाम
निगमबान तू है मेरा बाबा सैय्यद परैड़वाले ।
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राम कहो कृष्ण कहों ला इलाहा इल्लिलाह,
बुद्ध कहो या ईसा कहो ला इलाहा इल्लिलाह ।।
काबा में पूजो किंवा काशी में कोई फर्क नहीं पड़ता
दिल में तुम झाँक कर देखो ला इलाहा इल्लिलाह।।
आदमी का खून बहाने से कुछ हासिल नहीं होगा
इन्सानियत की पूजा करो ला इलाहा इल्लिलाह।।
रोते हुए इन्सां को ज़रा हंसा के दिखला दो
फक्र् से मुस्कराये खुदा ला इलाहा इल्लिलाह ।।
इन्सानियत हो तो सीना तान के तुम कह दो
पड़ौसी मेरा ईमान है ला इलाहा इल्लिलाह ।।
प्रेम की शाख पे यारों दिलों के फूल खिलते हैं
मीठी मीठी जुबान से बोलो ला इलाहा इल्लिलाह।।
किसी मुफलिस की भूख से ज्यादा कुछ भी नहीं होता
एक वक्त की रोटी दे दो ला इलाहा इल्लिलाह ।।
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